अग्नि के उपासक और समुदाय के साथ घनिष्ठता से जुड़े हुए! ये है पारसी कम्युनिटी। जानना चाहते हैं कि पारसी धर्म की शादी कैसे होती है ?
ब्लॉग में जानिये पारसी विवाह की रस्में।
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पारसी धर्म की शादी कैसे होती है ? अद्भुत समुदाय की अनोखी विवाह रस्में
दूध में शक्कर सा मिला हुआ है भारत में पारसी समुदाय। ऐसे ही भारतीय संस्कृति घुली है पारसी विवाह की रस्मों में।
जानते हैं zohrashtrian religion के पारसी समुदाय से, कि पारसी शादी में कौन सी रस्में होती हैं ?
पारसी धर्म की सगाई रस्में
पारसी सगाई में परिवार और समुदाय की स्वीकृति काफी महत्वपूर्ण है। समुदाय के बाहर विवाह करने पर इसके सदस्य को समुदाय से बाहर कर दिया जाता है।
रुपया परवानू
इस रस्म में लड़की के घर दोनों पक्ष की निकटवर्ती औरतें सम्मिलित होती हैं। घर को तोरन और सुन्दर रंगोली से सजाकर नए रिश्ते की नींव सकारात्मक ऊर्जा संग डाली जाती है।
रंगोली पर रखे पटले पर कन्या को खड़ा कर लड़के की माँ ब्रोकेड की लाल थैली में चांदी का सिक्का देती है। यही रस्म फिर लड़की वाले लड़के के घर निभाते हैं। हो गई स्वीकृति !🙂 अब पारसी कैलेंडर के अनुसार शादी और सगाई का मुहूर्त निकलेगा।
आद्रवाणु और सगन
इस रस्म में लड़की के घर महिलाओं संग परिवार के पुरुष भी शामिल होते हैं। पारसियों के पूज्य अग्नि को तेल के दिए में प्रज्ज्वलित कर लड़के की माँ उसमें चांदी का सिक्का डालती हैं।
वो होने वाली बहु पर आछू मीछू की रस्म निभाती हैं। प्रेम से उसे लाल साड़ी, लाल चूड़ियां, अन्य उपहार देती हैं। अब लड़का-लड़की को संग खड़ा कर दोनों की माताएं उनका तिलक करती हैं और दही शक्कर खिलाती हैं। प्रेम में डूबी युगल जोड़ी एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सबका आशीष प्राप्त करती है। हो गया सगन 🙂!
आद्रवानू
पर्शिया में अग्नि को आद्र कहते हैं इसलिए इस रस्म को आद्रवानू कहते हैं। |
अछू मीछू में क्या होता ?
यह पारसी और भारतीय संस्कृति के समावेश से बनी नज़र उतारने की रस्म है। यह रस्म एक सुहागिन स्त्री निभाती है (ज्यादातर माँ)। थाली में अंडा, नारियल, सुपारी, कुमकुम, चावल, केतली में जल लेकर स्त्री खड़ी होती हैं। माँ बच्चो का तिलक कर उसके सिर से सात बार अंडा एवं नारियल घुमा कर फोड़ देती हैं। पान सुपारी भी सात बार घुमा कर फेंक देते हैं। बच्चों पर चावल की बौछार कर जल से पैरों का सेवल करते हैं। |
पारसी लगन से पहले की रस्में
माधवसारो
माधवसारो नवजीवन के प्रारम्भ का उत्साह मनाती, आम के पौधे को रोपने की रस्म है। माँ से लाल साफा बंधवाकर लड़के के घर लड़का और लड़की के घर उसका भाई, यह रस्म निभाते हैं। बहनें गमले को कुमकुम, हल्दी आदि शुभ रंगों से सजाती हैं। सिर्फ रिश्तेदार ही नहीं बल्कि पारसी पुजारी भी पारसी प्रार्थना से पौधे को आशीर्वाद देते हैं।
पौधे की मिट्टी में परिवार की इच्छानुसार चांदी या सोने की भस्म मिलाई जाती हैं। लड़का अंडे और नारियल को सात बार पौधे से घुमाकर फोड़ता है और पान सुपारी मिटटी में दबाता है।
वरध पत्र
अपने आने वाले कल के उत्साह में यह समुदाय पूर्वजों को बिल्कुल नहीं भूलता। जिनसे इनका बीता हुआ कल था, आने वाले कल के लिए उन्हीं का आशीष लेती रस्म है वरध पत्र। लगन तक उत्साह और उल्लास भरा माहौल चलता है। साथ ही अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना भी होती है।
अदारनि
इसमें दूल्हे के घरवाले दुल्हन के घर जाकर उसको कपड़े, गहने व अन्य उपहार देते हैं। उसके बाद? 🙂, शादी की रस्म है तो बस खाना पीना हल्ला गुल्ला।
सूपड़ा नू मूरत
यह हल्दी की रस्म है। एक औरत खरल और बट्टे संग बैठती है। उसके चारों तरफ चार औरतों के हाथ में पान, सुपारी, खजूर, नारियल टुकड़े का बंडल होता है। इसे सूपड़ा कहते हैं।
विवाह के पारसी मंगल गीत गाते हुए ये औरतें सूपड़ा एक से दूसरे को देते हुए सात बार घुमाती है। इसके बाद पाँचों सुहागन औरतें हाथ मिलाकर खलबट्टे में हल्दी और दूध पीसकर paste तैयार करती हैं। यह चमकाता है दूल्हा-दुल्हन की त्वचा।
पारसी लगन दिन की रस्में
नहान
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत होती है शुद्धि से और लगन की शुरुआत रस्मे-नहान मतलब स्नान से। यहाँ स्नान के दौरान पुजारी बाहर प्रार्थना करते है। इसके बाद वर और कन्या विवाह के लिए तैयार होते हैं।
दूल्हा पोशाक | दुल्हन पोशाक |
सफ़ेद पायजामा / पैंट
सफ़ेद डुगली व काली टोपी |
सफ़ेद ब्लाउज़
सफ़ेद साड़ी |
विवाह स्थल के लिए प्रस्थान से पहले पुजारी कुमकुम चावल से दोनों का तिलक कर फूल माला पहनाते हैं और नारियल देते हैं। विवाह स्थल में प्रवेश से पहले माता फिर अछू मीछू करती है।
चेरो बांधवानो
यहाँ से विवाह की मुख्य रस्म शुरू हो रही है। लड़का लड़की कुर्सी पर एक दूसरे की तरफ मुँह कर बैठते हैं। घर के सदस्य दोनों के बीच एक चादर से पर्दा करते हैं जिसे आरा अंतर कहते हैं। दोनों के उलटे हाथ में कच्चे चावल होते हैं और वो एक दूसरे का सीधा हाथ चादर के नीचे से पकड़ते हैं। पुजारी द्वारा प्रार्थना के मध्य इसी अवस्था में हाथों को सात बार कच्चे धागे से बांध देते हैं। दोनों कुर्सी को साथ में सात बार बांधते हैं।
सातवीं बार पूरा होते ही वो चावल एक दूसरे पर फेंकते हैं। जिसने पहले फेंका इसका मतलब रिश्ते में प्रभुत्व उसी का। 🙂 अब दोनों पति पत्नी हैं और आरा अंतर हट जाता है। बंधे हाथ खोलती हैं लड़की की बहनें वो भी शगुन लेकर। ज़ाहिर है यहाँ हंसी मजाक का पिटारा तो खुलेगा ही।
पैवन्द-ए- जशनुई
लड़का लड़की साथ में तेल की ज्योत जलाकर पवित्र अग्नि का आह्वान कर उनसे आशीर्वाद लेते हैं। यह ज्योत विवाह समारोह के अंत तक जलती रहती है।
पारसी पुजारी दोनों को zohrashtrian रिवाज़ या पैवन्द नमः के अनुसार विवाह की कस्में सुनाते हैं। तीन बार पुजारी के पूछे जाने पर तीसरी बार में लड़की, लड़के को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करती है। इसके बाद लड़के एवं अन्य उपस्थित लोगों की स्वीकृति लेते हैं। पैवन्द नमः से उन्हें शादी के लिए सन्देश दिए जाते हैं। पारसी विवाह पारसी पंचायत में registered होता है। लड़का लड़की विवाह अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हैं। अंत में पुजारी उन्हें आशीर्वाद देकर उनपर चावल और गुलाब की बौछार करते हैं।
हाथ बोरवानो, पाँव धोवानू और आशीर्वाद
लड़की की बहन थोड़े तंग मुँह के बर्तन में पानी लेकर आती है जिसमें लड़का हाथ डालकर हाथ धोता है। हाथ अंदर लड़के की मर्जी से जाता है पर बाहर साली साहिबा को मनचाहा शगुन देकर निकलता है। यही है हाथ बोरवानू।
बख्शती दूल्हे की बहन भी नहीं है। वह पानी में दूध मिलाकर लाती है और धमकी देती है कि शगुन नहीं मिला तो जूतों पर दूध डालकर गन्दा कर देगी। दूल्हे मियां को फिर जेब ढीली करनी पड़ती है। यह है पाँव धोवानू। 🙂
हंसी मजाक मस्ती के साथ शुरू होता है मेहमानों का नवविवाहित जोड़ी को आशीर्वाद और उपहार देने का सिलसिला।
जशन और भोज
अब तो party शुरू हुई है 🙂, है न ! सभी अतिथियों को स्वादिष्ट भोज मिल जाता है जिसके लिए पारसी मशहूर हैं। वर और कन्या एक दूसरे को अपनी प्लेट से अपने हाथों से खाना खिलाते हैं। खुल कर होता है नाचना गाना हंसी मजाक। अब देखिये असली पारसी आप; Full of life! बॉलीवुड movies में दिखाए गए किसी boring अंकल जैसे बिल्कुल नहीं।
विवाह स्थल से प्रस्थान
विवाह पश्चात पति-पत्नी पारसी मंदिर (Temple of Fire) में दर्शन करने जाते हैं। जाने से पहले जो तेल का दिया जलाया था उसकी लौ पर गुलाब को रखकर बुझा देते हैं। कुछ लोग इसे अपने साथ ले जाकर newly wed के कमरे में bedside पर रख देते हैं।
कमरे में जाने से पहले लड़के की माँ दोनों की नज़र (आछू मिछू) उतारती हैं और आशीर्वाद देती हैं।
यह थे पारसी विवाह के रस्म और रिवाज़। आशा करती हूँ कि आपको मेरा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। मुझे comment section में अवश्य बताएं।
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रस्म और रिवाज़ हैं, एक दूसरे के हमदम!
कलम से पहरा इनपर, रखती हूँ हर दम!